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As you sow, so you reap

  • इह यत् क्रियते कर्म तत् परत्रोपभुज्यते।
    सिक्तमूलस्य वृक्षस्य फलं शाखासु दृश्यते॥
  • iha yat kriyate karma tat paratropabhujyate|
    siktamūlasya vṛkṣasya phalaṁ śākhāsu dṛśyate||
  • Consequences of deeds indulged in upon earth are experienced in the afterlife,
    just as the fruits of well-watered trees are relished later.
  • इस संसार में जो कर्म किया जाता है उस फल का भोग परलोक में प्राप्त होता है। यथा अभी सींचे गए बीज का फल कालान्तर में शाखाओं के रूप में देखा जा सकता है।
  • – Vyāsa-subhāṣita-saṅgrahaḥ, 26

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