मैं आनंद हूँ

I am bliss
  • मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं
    न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे।
    न च व्योमभूमिर्न तेजो न वायुः
    चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
  • manobuddhyahaṅkāracittāni nāhaṁ
    na ca śrotrajihve na ca ghrāṇanetre |
    na ca vyomabhūmirna tejo na vāyuḥ
    cidānandarūpaḥ śivo'haṁ śivo'ham ||
  • मैं मन, बुद्धि, अहंकार या धारणा नहीं हूँ। मैं कान, जीभ, नाक या आंखें नहीं हूँ (मैं मुझे विशेषता देने वाले इंद्रिय अंग नहीं हूँ )। मैं आकाश, पृथ्वी, अग्नि या वायु नहीं हूँ (मैं शारीरिक बनावट के घटक तत्वों में से कोई भी नहीं हूँ )। मैं शुभ हूँ; अस्तित्व, चेतना और आनंद का मूरत रूप हूँ।
  • - निर्वाण शतक

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